इतना मीठा बन के मत रहिए शकर हो जाएगी
सुधीर मिश्र: चुनाव का मौसम और नेताओं की मिठास देखने लायक है। वोटर जब मुकद्दर तय करने को सामने खड़ा हो तो तीखा आखिर बोल भी कौन सकता है, हालांकि सियासत कई बार अजब रंग दिखाती है। हाल यह है कि कोर्ट को यह...
View Articleरील बनाने वाले चुनाव क्यों नहीं लड़ लेते?
लेखक: सुधीर मिश्र ‘चुनावों में करते हैं अजीबो-गरीब बातें काश ये नेता थोड़ी पढ़ाई करके आते’ देखिए पढ़ाई लिखाई में कुछ नहीं रखा। जमाना कटेंट क्रिएटर्स का है। आने वाले वक्त में इनका अपना राजनीतिक दल भी बन...
View Articleउम्मीद न रख, ये हैं सियासत वाले
लेखक: सुधीर मिश्र ज़िया ज़मीर का शेर है- “मुल्क तो मुल्क घरों पर भी है कब्ज़ा उस का अब तो घर भी नहीं चलते हैं सियासत के बगैर” तमिलनाडु के एक नेता ए राजा ने हाल ही में कहा कि भारत एक राष्ट्र है ही नहीं,...
View Articleतो क्या अब सूटकेस वाले नोट से चुनाव होंगे
लेखक: सुधीर मिश्र शकील बदायूनी का शेर है- “कांटों से गुज़र जाता हूं दामन को बचा कर फूलों की सियासत से मैं बेगाना नहीं हूं” कितना बढ़िया सुंदर सिस्टम था इलेक्टोरल बॉन्ड का। काले धन से बॉन्ड खरीदकर...
View Articleझपटमारों के रोजगार तंत्र को समझिए
लेखक: सुधीर मिश्र शेख इब्राहिम ज़ौक का शेर है “पिला मय आश्कारा हम को किस की साक़िया चोरी खुदा से जब नहीं चोरी तो फिर बंदे से क्या चोरी” दिल्ली बढ़िया शहर है। फोन हो या लैपटॉप। कितना भी महंगा हो और...
View Articleआखिर दिल्ली क्रिकेट का यह हाल क्यों है
लेखक: सुधीर मिश्र उमैर नजमी का शेर है- “खेल दोनों का चले तीन का दाना न पड़े सीढ़ियां आती रहें सांप का ख़ाना न पड़े” एक फिल्म में सिविल सर्विसेज का एक नाकाम प्रतिभागी युवाओं को समझाता है कि यह इम्तहान...
View Articleहिट एंड रन कानून का सख्त होना ज़रूरी है लेकिन
सुधीर मिश्र राज़ यज़दानी का शेर है- “सज़ा के झेलने वाले ये सोचना है गुनाह कोई क़ुसूर भी तुझ से कभी हुआ कि नहीं” ड्राइवर थोड़ा गुस्से में था- देखिए इस बाइक वाले को रॉन्ग साइड इतनी स्पीड में आ रहे हैं।...
View Articleरोजी-रोजगार के सवालों का जवाब तलाशना ही होगा
निसार नासिक का शेर है- जो मेरे दिल में फरोज़ां है शाइरी की तरह मैं उस को ढूंढता फिरता हूं नौकरी की तरह एक रील देख रहा था। उसमें एक स्टैंडअप कॉमेडियन चैट जीपीटी का मजा ले रहा था। वह कहता है- सब कहते थे...
View Articleगर कयामत ये नहीं है तो कयामत क्या है
उम्मीद फ़ाज़िल का शेर है- गर क़यामत ये नहीं है तो क़यामत क्या है शहर जलता रहा और लोग घर से न निकले थोड़ी बारिश से दिल्ली के हालात कुछ बेहतर हुए हैं, लेकिन दो दिन पहले की बात है। गाजियाबाद में तीन लोगों...
View Articleकोशिश हो कि कभी सांसद पति या विधायक पति के बोर्ड नजर न आएं
सुधीर मिश्र मुनीर नियाज़ी ने लिखा है- ज़रूरी बात कहनी हो, कोई वादा निभाना हो उसे आवाज़ देनी हो उसे वापस बुलाना हो हमेशा देर कर देता हूं मैं संसद और विधानसभाओं में औरतों को 33 पर्सेंट सीटें देने के...
View Articleवही बेगाने चेहरे हैं जहां जाएं जिधर जाएं
सुधीर मिश्र मुनव्वर राना ने लिखा है- किसी के जख़्म पर चाहत से पट्टी कौन बांधेगा अगर बहनें नहीं होंगी तो राखी कौन बांधेगा भाई-बहन के प्यार का त्योहार है रक्षा बंधन। सोशल मीडिया पर लोग तरह-तरह की फोटो,...
View Articleवही बेगाने चेहरे हैं, कहां जाएं-किधर जाएं
सुधीर मिश्र मुनव्वर राना ने लिखा है- किसी के जख़्म पर चाहत से पट्टी कौन बाँधेगा अगर बहनें नहीं होंगी तो राखी कौन बाँधेगा भाई-बहन के प्यार का त्योहार है रक्षा बंधन। सोशल मीडिया पर लोग तरह तरह के फोटो,...
View Articleदवाओं के इस दर्द की दवा क्या है
मिर्जा ग़ालिब का मशहूर शेर है- दिल-ए-नादां तुझे हुआ क्या है आखिर इस दर्द की दवा क्या है दर्द की दवा क्या है? इस पर बाद में बात करेंगे। अभी जरूरी है दवा के दर्द पर चर्चा करना। एक प्रिंसिपल साहिबा का फोन...
View Articleतेरी आंखों का कुछ कुसूर नहीं, हां मुझी को खराब होना था
मुनव्वर राना साहब का मशहूर शेर है – एक आंसू भी हुकूमत के लिए खतरा है तुमने देखा नहीं आंखों का समुंदर होना वैसे आजकल आंखें वाकई समुंदर हो रही हैं। दिल्ली से मुंबई और राजस्थान से मणिपुर तक लोगों की आंखों...
View Articleज्योति मोर्या केसः लगता है कुंआरों की पेंशन अब दूसरे राज्यों में भी शुरू होगी
सुधीर मिश्र नीलमा नाहीद दुर्रानी का शेर है- औरत अपना आप बचाए तब भी मुजरिम होती है औरत अपना आप गंवाए तब भी मुजरिम होती है प्रज्ञा से करीब तीन साल पहले एक गांव में मुलाकात हुई थी। तब शायद वह सातवीं क्लास...
View Articleअरे इमली है, कच्चा आम है क्यों परेशान हैं टमाटर के दामों पर
गुलज़ार ने लिखा है- कि जैसे पान में महंगा क़िमाम घुलता है ये कैसा इश्क़ है उर्दू ज़बां का किसी इलाहाबादी आईएएस अफसर से पूछिए तो वह कहेगा- ठीक वैसा ही इश्क जैसा, अरहर की दाल में टमाटर-प्याज के तड़के का।...
View Articleवैसे यह फिक्र मुखर्जी नगर फैक्ट्री से निकलनेवाले IAS/IPS की होनी चाहिए
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ का शेर है- बे-दम हुए बीमार दवा क्यों नहीं देते तुम अच्छे मसीहा हो शिफ़ा क्यों नहीं देते यूपी के जौनपुर में एक गांव है। वहां से दर्जनों आईएएस, आईपीएस और पीसीएस अफसर निकले हैं। इस गांव...
View Articleदिल पागल है रोज़ नई नादानी करता है
दाग़ देहलवी का शेर है- तुम्हारा दिल मिरे दिल के बराबर हो नहीं सकता वो शीशा हो नहीं सकता ये पत्थर हो नहीं सकता शायर जो बात हमेशा से जानते हैं, जाने क्यों ये डॉक्टर नहीं समझते। जैसे हर इंसान एक सा नहीं...
View Articleहम बड़े हो जाते हैं, पर हमारे खेल नहीं
हस्तीमल हस्ती का शेर है- खेल ज़िंदगी के तुम खेलते रहो यारो हार जीत कोई भी आख़िरी नहीं होती बचपन में गली क्रिकेट तो तकरीबन सभी ने खेला होता है। उस खेल के नियमों का कोई विधान नहीं था। काल-खंड,...
View Articleअरे, अब अंधविश्वास भी मेड इन चाइना
जां निसार अख़्तर का शेर है- हर-चंद ए’तिबार में धोके भी हैं मगर ये तो नहीं किसी पे भरोसा किया न जाए भरोसा, भक्ति या विश्वास सब अच्छा है। पर यह सच है कि धोखा, फरेब और विश्वासघात भी वहीं होता है- जहां ये...
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